भारत की जनगणना – 2011

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20 Aug, 2017

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भारत की जनगणना – 2011

अंतिम जारी आंकड़ों के अनुसार, भारत की जनसंख्या 2001-2011 दशक के दौरान 18,14,55,986 बढ़कर 1,21,01,93,422 हो गई है। यानि पिछले 10 वर्र्षों में भारत की आबादी उतनी बढ़ गई है, जितनी ब्राजील की कुल आबादी है यानि दस साल में एक ब्राजील।

भारत की जनगणना-2011, भारत की 15वीं राष्ट्रीय जनगणना थी जो 1 मई, 2010 को आरंभ हुई थी। जनगणना को दो चरणों में पूरा किया गया। जनगणना के अनंतिम आंकड़ों को 31 मार्च, 2011 को जारी किया गया। सम्पूर्ण रिपोर्ट के वर्ष 2012 में जारी किए जाने की उम्मीद है। देश भर में कुल 58 करोड़ महिलाओं की आबादी है।  पिछले दस वर्र्षों में महिलाओं की आबादी में 9 करोड़ की वृद्घि हुई है, जबकि पुरुषों की कुल आबादी 62 करोड़ है। आंकड़ों के मुताबिक देश में पुरुषों की संख्या में 17.19 फीसदी और महिलाओं की संख्या में 18.12 फीसदी का इजाफा हुआ है। इस तरह से जनसंख्या के मामले में भारत ने दूसरा स्थान बरकरार रखा है। इस दौरान देश की साक्षरता दर भी 64.83 फीसदी से बढ़कर 74.04 फीसदी हो गई है।

भारत का क्षेत्रफल कुल विश्व के क्षेत्रफल का मात्र 2.4 फीसदी ही है, लेकिन इसकी जनसंख्या का प्रतिशत कुल विश्व जनसंख्या का 17.5 फीसदी है। उत्तर प्रदेश भारत का सबसे बड़ी जनसंख्या वाला राज्य है जिसकी जनसंख्या लगभग 20 करोड़ है। प्रत्येक 10 में से छह भारतीय उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश और तमिलनाडु में निवास करते हैं।

प्रत्येक वर्ष 1.70 करोड़ की वृद्धि

भारत में बीते पांच वर्र्षों में जनसंख्या वृद्धि दर 1.4 फीसदी रही है। यानि प्रत्येक वर्ष जनसंख्या में लगभग एक करोड़ 70 लाख लोग जुड़ रहे हैं। पूर्वोत्तर राज्यों और उत्तराखंड में जनसंख्या एक फीसदी की दर से बढ़ रही है।

जनगणना: खास बिंदु

–  भारत की आबादी अब संयुक्त राज्य अमेरिका, इंडोनेशिया, ब्राजील, पाकिस्तान, बांग्लादेश और जापान की संयुक्त जनसंख्या के बराबर है।

– दुनिया के दो सबसे ज्यादा आबादी वाले देश चीन और भारत के बीच का फासला भी कम हुआ है। 2001 में दोनों देशों की आबादी में 23.8 करोड़ का फासला था, जो अब घटकर 13 करोड़ रह गया है।

– देश में पुरुषों की कुल आबादी 62 करोड़ 37 लाख है, जबकि देश में महिलाओं की आबादी 58 करोड़ 65 लाख है।

– पिछले 10 वर्र्षों के दरमियान देश की आबादी में 17.6 फीसदी की वृद्धि हुई। इस दौरान कुल जनसंख्या में 18 करोड़ की बढ़ोत्तरी हुई।

– पुरुषों की तुलना में महिला साक्षरता दर में वृद्धि।

– जनसंख्या के अंतरिम आंकड़ों के मुताबिक पिछले एक दशक के दौरान भारत का कुल लिंगानुपात 933 से बढ़कर 940 हो गया, जो वर्ष 1961 के बाद सर्वाधिक है। लेकिन बच्चों का लिंगानुपात 927 से घटकर 914 हो गया। ये अनुपात आजाद भारत के इतिहास में सबसे कम है।

– आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2001 में कुल जनसंख्या का लगभग 16 फीसदी बच्चे थे, लेकिन वर्ष 2011 में ये कम होकर लगभग 13 फीसदी रह गया है। विशेषज्ञों के अनुसार यह भारत की घटती जन्म दर की ओर संकेत कर रहा है।

– जनसंख्या के आधार पर देश की राजधानी दिल्ली में प्रतिवर्ग किमी. सबसे ज्यादा आबादी 11297 लोग रहते हैं। इसमें भी राजधानी के उत्तर-पूर्व जिले में सबसे ज्यादा 37,346 लोग प्रतिवर्ग किमी. में रहते हैं।

– सबसे कम जनसंख्या घनत्व वाला जिला अरुणाचल प्रदेश का दिबांग है। यहां प्रतिवर्ग किमी. के हिसाब से सिर्फ एक व्यक्ति रहता है।

– देश में 82.1 फीसदी पुरुष और 64.4 फीसदी महिलाएं साक्षर हैं। पिछले दस वर्र्षों में महिलाएं 4 फीसदी ज्यादा साक्षर हुईं हैं।

– अरुणाचल प्रदेश और बिहार में सबसे कम साक्षरता है। यद्यपि मध्य प्रदेश के आलीराजपुर और छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले देश के सबसे कम साक्षर जिले हैं।

– केरल और लक्षद्वीप में सबसे ज्यादा क्रमश: 93 और 92 फीसदी साक्षरता है।

– आंकड़ों के मुताबिक उत्तर प्रदेश देश का सबसे ज्यादा आबादी वाला राज्य है। प्रदेश की जनसंख्या 20 करोड़ है।

– जनसंख्या के हिसाब से महाराष्ट्र दूसरे स्थान पर है।

– नगालैंड देश का एकमात्र राज्य है, जिसकी जनसंख्या में कमी आई है।

– मुंबई का ठाणे देश का सबसे ज्यादा आबादी वाला जिला है।

2050 में भारत होगा सबसे आगे

भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की 17 जुलाई, 2010 को जारी की गई एक रिपोर्ट के अनुसार भारत 2050 में विश्व का सबसे ज्यादा जनसंख्या वाला देश बन जाएगा। यह भी आशंका व्यक्त की जा रही है कि जनसंख्या विस्फोट के मामले में भारत चीन को पीछे छोड़ देगा। पिछले 100 वर्र्षों के दौरान भारत की जनसंख्या पांच गुनी बढ़ गई है।

रिपोर्ट के अनुसार उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश और दक्षिण भारत के राज्यों की जनसंख्या तेजी से बढ़ रही है। अनुमान है कि 2026 तक भारत की आबादी में 37 करोड़ 10 लाख लोग और जुड़ जाएंगे। यदि देश की जनसंख्या इसी गति से बढ़ती रही तो 2050 तक 161 करोड़ तक पहुँच जाएगी। जबकि चीन की करीब 142 करोड़ पर ठहर जाएगी। उस स्थिति में देश के इंफ्रास्ट्रक्चर पर जबर्दस्त दबाव पड़ेगा।

दूसरी ओर संयुक्त राष्ट्र संघ की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2060 में भारत दुनिया का सबसे ज्यादा आबादी वाला देश बन जाएगा। तब देश की आबादी एक अरब सत्तर करोड़ पर पहुँच जाएगी। भारत की आबादी में गिरावट का दौरा शुरू हो जाएगा। रिपोर्ट के अनुसार चीन की आबादी वर्ष 2030 में अपने अधिकतम स्तर पर पहुँच जाएगी। उस वक्त चीन की आबादी एक अरब 39 करोड़ होगी।

दुनिया की आबादी हुई सात अरब

संयुक्त राष्ट्र संघ के आंकलन के मुताबिक 31 अक्टूबर, 2011 को दुनिया की आबादी 7 अरब हो गई। दुनिया के तमाम हिस्सों में जन्में बच्चों को प्रतीक के तौर पर 7 अरबवां बच्चा माना गया। इसमें भारत के साथ-साथ फिलीपींस में जन्मी बच्चियां भी शामिल हैं। 31 अक्टूबर को एक सामुदायिक केंद्र में नरगिस नाम की जन्मी बच्ची को भारत में सात अरबवां बच्चा माना गया। यह दावा प्लान इंडिया नाम के गैर सरकारी संगठन ने किया। ऐसा माना जा रहा है कि प्लान इंटरनेशनल का भारत में एक बच्ची को सात अरबवां बच्चा मानने के पीछे उस समस्या को सामने लाना है, जो भारत में बालिका भ्रूण हत्या से जुड़ी है।

 

साक्षरता दर

भारत में साक्षरता दर का पता लगाने के लिए जनगणना में 7 वर्ष या उससे अधिक आयु के व्यक्तियों की गणना की जाती है, जो किसी भी भाषा में लिख और पढ़ सकते हैं। देश में 1991-2001 के दौरान साक्षरता के क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति हुई। स्वतंत्रता के बाद पहली बार, निरक्षरों की कुल संख्या में 3.19 करोड़ से अधिक की कमी आई। 2011 की जनगणना के अनुसार देश में औसत साक्षरता 74.04 प्रतिशत है। पुरुषों में साक्षरता (82.14 प्रतिशत) स्त्रियों में साक्षरता (65.46 प्रतिशत) की अपेक्षा अधिक है। देश में सर्वाधिक साक्षरता केरल में (93.91 प्रतिशत) तथा सबसे कम साक्षरता बिहार (63.82%) में है। स्त्रियों में सबसे कम साक्षरता दर (52.66%) राजस्थान की व झारखण्ड की 57.63% काफी कम है। केन्द्र शासित प्रदेशों में सबसे अधिक साक्षरता लक्षद्वीप में 92.28% है। न्यूनतम साक्षरता दादरा तथा नगर हवेली में 77.65% है।

 

 

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